पाकिस्तान की शर्तें: ICC और BCCI किन मांगों पर कर सकते हैं विचार?
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC), भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के बीच हुई बैठकों में पाकिस्तान ने कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। इन शर्तों पर विचार किया जा रहा है कि इनमें से कौन सी स्वीकार्य होंगी और कौन सी नहीं। इसका सीधा असर भारत-पाकिस्तान के मैचों पर पड़ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं पाकिस्तान की इन मांगों और उन पर संभावित फैसलों को।
1. बांग्लादेश के लिए बढ़ा हुआ मुआवजा
पीसीबी की पहली शर्त बांग्लादेश के लिए बढ़े हुए मुआवजे की थी। उनका तर्क था कि बांग्लादेश को विश्व कप से बाहर होने के कारण नुकसान न हो, इसलिए उसे अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। हालाँकि, इस शर्त के माने जाने की संभावना न के बराबर है। ICC का मानना है कि बांग्लादेश ने खुद ही विश्व कप से हटने का फैसला किया था, और सुरक्षा संबंधी कोई खतरा नहीं था। ऐसे में उसे बढ़ा हुआ मुआवजा देने का कोई कारण नहीं है। यह शर्त cancelled कर दी जाएगी।
2. बांग्लादेश को पार्टिसिपेशन फीस
दूसरी शर्त थी कि विश्व कप से हटने के बावजूद बांग्लादेश को participation fee मिले। हर टीम को टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए करोड़ों की यह फीस मिलती है। लेकिन चूंकि बांग्लादेश ने खुद खेलने से मना कर दिया था, ICC इस शर्त को मानने के मूड में नहीं है। उनका तर्क है कि जब टीम खेली ही नहीं, तो उसे फीस क्यों दी जाए। ICC ने बांग्लादेश को नाम वापस लेने के लिए नहीं कहा था। यह शर्त भी rejected होने की पूरी संभावना है।
3. आईसीसी टूर्नामेंट्स के लिए पाकिस्तान को मेजबानी का अधिकार
पीसीबी ने यह भी मांग की कि पाकिस्तान को ICC tournaments की मेजबानी का अधिकार मिले। हालाँकि, सुरक्षा चिंताओं और आतंकी गतिविधियों के कारण इस शर्त के माने जाने की संभावना नहीं है। पाकिस्तान में लगातार होने वाली आतंकी घटनाएं, जैसे बलूचिस्तान और इस्लामाबाद के मामले, और अतीत में श्रीलंकाई टीम पर हुए हमले, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को वहां कोई भी इवेंट आयोजित करने से रोकते हैं। सुरक्षा को देखते हुए यह शर्त declined होगी।
4. आईसीसी के रेवेन्यू शेयर में पाकिस्तान की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए
यह चौथी शर्त है जिस पर सहमति बनने की संभावना है। पाकिस्तान ने मांग की है कि ICC revenue share में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाई जाए, जो वर्तमान में लगभग 5% (लगभग 350 करोड़ रुपये) है। वे इसे बढ़ाकर 6% या 7% करना चाहते हैं, जिससे उनके सालाना राजस्व में वृद्धि होगी। यह एक वाजिब मांग प्रतीत होती है जिसे ICC और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) मान सकते हैं, क्योंकि BCCI के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं और वे मामूली हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सहमत हो सकते हैं। यह शर्त likely to be accepted.
5. भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज
पांचवी शर्त भारत के साथ द्विपक्षीय श्रृंखला (bilateral series) आयोजित करने की थी। पाकिस्तान का कहना है कि भारत के साथ मैचों से उन्हें काफी राजस्व मिलता था, जो द्विपक्षीय सीरीज बंद होने के बाद रुक गया है। हालाँकि, ICC इस मामले में सीधे दखल नहीं दे सकती, क्योंकि यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और भारत सरकार को लेना है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पार आतंकी गतिविधियां बंद नहीं होतीं, द्विपक्षीय श्रृंखला संभव नहीं है। इसलिए, यह शर्त not acceptable होगी।
6. हैंडशेक प्रोटोकॉल को अनिवार्य किया जाए
छठी और आखिरी शर्त handshake protocol को अनिवार्य करने की थी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि भारतीय खिलाड़ी अक्सर उनसे हाथ नहीं मिलाते, जिससे उनकी बेइज्जती होती है। यह एक वाजिब मांग मानी जा रही है, क्योंकि खेल भावना के अनुसार, खिलाड़ी को मैच के बाद एक-दूसरे से हाथ मिलाना चाहिए। ICC और BCCI दोनों इस शर्त को स्वीकार कर सकते हैं और अपने खिलाड़ियों को खेल खत्म होने के बाद हाथ मिलाने के लिए कह सकते हैं। ICC इवेंट्स में इस तरह के प्रोटोकॉल का पालन किया जा सकता है। यह शर्त भी likely to be accepted.
संक्षेप में, पीसीबी की छह शर्तों में से दो के माने जाने की संभावना है – रेवेन्यू शेयर में वृद्धि और हैंडशेक प्रोटोकॉल। बाकी शर्तों को स्वीकार किए जाने की संभावना कम है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इन दो शर्तों के स्वीकार होने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अपना रुख बदलेगा और भारत के साथ मैच खेलने को तैयार होगा।
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