वंदे मातरम को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा दर्जा: कैबिनेट ने नेशनल ऑनर एक्ट में बदलाव को दी मंजूरी

वंदे मातरम को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा दर्जा: कैबिनेट ने नेशनल ऑनर एक्ट में बदलाव को दी मंजूरी

भारत सरकार की कैबिनेट ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) को भी वही सम्मान और कानूनी सुरक्षा मिलेगी जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ (Jana Gana Mana) को मिलती है। कैबिनेट ने इसके लिए ‘Prevention of Insults to National Honour Act’ (राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण अधिनियम) में संशोधन यानी बदलाव करने को मंजूरी दे दी है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम को लिखे हुए 150 साल पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चटर्जी ने इस गीत को साल 1875 में लिखा था। अब इस गीत को कानूनी रूप से राष्ट्रगान के बराबर खड़ा करने की तैयारी है।

कैबिनेट के फैसले का मुख्य उद्देश्य

जब 1950 में भारत एक गणतंत्र (Republic) बना था, तब ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान (National Anthem) बनाया गया था। वहीं ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत (National Song) का दर्जा दिया गया था। उस समय यह माना गया था कि दोनों का सम्मान बराबर होना चाहिए। लेकिन कानून में वंदे मातरम को वह सुरक्षा नहीं मिली थी जो राष्ट्रगान को मिली हुई थी।

अब कैबिनेट के नए फैसले से इस कानूनी कमी को दूर किया जाएगा। सरकार का मकसद राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति नागरिकों के जुड़ाव और सम्मान को कानूनी रूप से मजबूत करना है।

कानूनी रूप से क्या बदलेगा?

अभी तक ‘Prevention of Insults to National Honour Act’ मुख्य रूप से राष्ट्रगान के अपमान पर सजा का प्रावधान करता था। वंदे मातरम के लिए नियम थोड़े लचीले थे। लेकिन नए संशोधन के बाद स्थिति बदल जाएगी:

  • समान दंड (Equal Penalties): वंदे मातरम के दौरान किसी भी तरह की बाधा डालने या उसका अपमान करने पर वही सजा मिलेगी जो राष्ट्रगान के अपमान पर मिलती है।
  • कानूनी सुरक्षा: जो कानूनी सुरक्षा अभी तक सिर्फ ‘जन गण मन’ को मिलती थी, वह अब ‘वंदे मातरम’ को भी मिलेगी।
  • अनिवार्य सम्मान: अब तक वंदे मातरम का सम्मान करना एक नैतिक जिम्मेदारी मानी जाती थी, लेकिन अब यह कानूनी रूप से अनिवार्य (Enforceable) हो जाएगा।

किसे माना जाएगा ‘अपमान’ या ‘बाधा’?

कानून के तहत कुछ खास कामों को वंदे मातरम का अपमान माना जा सकता है। इसके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

  • जानबूझकर बाधा डालना: गीत बजने के दौरान शोर मचाना, नारे लगाना या तेज म्यूजिक बजाकर उसे दबाने की कोशिश करना।
  • मजाक उड़ाना: गीत का मजाक बनाना, गलत इशारे करना या औपचारिक कार्यक्रमों में इसके बोल (Lyrics) को अपमानजनक तरीके से बदलना।
  • प्रोटोकॉल का पालन न करना: सरकारी या औपचारिक कार्यक्रमों में गीत बजने के दौरान खड़े न होना, इधर-उधर घूमना या जोर-जोर से बातें करना।
  • संस्थानों में बाधा: स्कूलों की प्रार्थना सभा या सरकारी समारोहों में गीत के दौरान खलल डालना।

सजा का प्रावधान (Penalties)

अगर कोई व्यक्ति वंदे मातरम का अपमान करता है या उसमें बाधा डालता है, तो उसे राष्ट्रगान के अपमान के बराबर ही सजा मिल सकती है।

अपराध संभावित सजा
वंदे मातरम का अपमान या बाधा डालना 3 साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों

वंदे मातरम का इतिहास

वंदे मातरम का भारत के आजादी के आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसके इतिहास से जुड़ी कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • लेखक: बंकिम चंद्र चटर्जी (Bankim Chandra Chatterjee)।
  • साल: 1875 में पहली बार लिखा गया।
  • महत्व: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों और आम जनता के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत था।
  • वर्तमान स्थिति: 150 साल पूरे होने पर इसे अब कानूनी रूप से और भी मजबूत बनाया जा रहा है।

कैबिनेट का यह कदम वंदे मातरम की यात्रा को एक नए मोड़ पर ले आया है। एक ऐसा गीत जो कभी विरोध का स्वर था, अब वह कानून द्वारा पूरी तरह सुरक्षित राष्ट्रीय प्रतीक बनने जा रहा है।

FAQs

1. वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि अब वंदे मातरम का अपमान करने पर वही कानूनी कार्रवाई और सजा होगी जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान पर होती है।

2. वंदे मातरम का अपमान करने पर कितनी सजा हो सकती है?

नए नियमों के तहत, अपमान करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं।

3. क्या अब वंदे मातरम के दौरान खड़ा होना जरूरी होगा?

हां, सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल के तहत सम्मान देना जरूरी होगा। बैठे रहना या शोर मचाना अपमान की श्रेणी में आ सकता है।

4. वंदे मातरम किसने और कब लिखा था?

वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने साल 1875 में लिखा था।

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