Operation Sindoor: उरी में पाकिस्तान की गोलाबारी के जख्म आज भी ताजा, बच्चों के मन में बैठा डर

Operation Sindoor: उरी में पाकिस्तान की गोलाबारी के जख्म आज भी ताजा, बच्चों के मन में बैठा डर

जम्मू-कश्मीर के उरी (Uri) में पिछले साल हुई गोलाबारी की यादें आज भी लोगों के दिलों में बसी हैं। 7 मई 2025 को भारत ने Operation Sindoor शुरू किया था। यह ऑपरेशन कश्मीर में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के मिलिट्री और आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए किया गया था। लेकिन इस दौरान हुई भारी Shelling ने सीमा के पास रहने वाले आम लोगों की जिंदगी बदल दी है।

5 साल की अमायरा और उसके बॉक्स में रखे शेल के टुकड़े

उरी के बांदी (Bandi) गांव में रहने वाली 5 साल की अमायरा (Amaira) के पास एक छोटा सा बॉक्स है। इस बॉक्स में गुड़िया या खिलौने नहीं, बल्कि लोहे के नुकीले टुकड़े (Shrapnel) हैं। ये टुकड़े पिछले साल Operation Sindoor के दौरान पहाड़ों के पीछे से गिरे आर्टिलरी शेल्स के हैं। अमायरा इन टुकड़ों को अक्सर हाथ में लेकर देखती है।

अमायरा की मां उस रात को याद करते हुए बताती हैं कि आसमान में तेज गर्जना हो रही थी और जमीन कांप रही थी। अमायरा उस आवाज को “डरावनी बिजली” (Scary Thunder) कहती है। अमायरा ने बताया कि जब गोले गिर रहे थे, तब वह बहुत रो रही थी। वह आज भी उस रात को याद करके सो नहीं पाती है। गांव के दूसरे बच्चों के पास भी ऐसे ही टुकड़ों का कलेक्शन है, जो उनके घरों और खेतों में गिरे थे।

घरों और दुकानों पर गोलाबारी का असर

उरी में कई घरों की दीवारों पर आज भी गोलाबारी के निशान मौजूद हैं। अमायरा के घर की दीवारों पर दर्जनों छेद हैं। घर की छत पर भी छोटे-छोटे छेद हो गए हैं, जिनसे अब रोशनी अंदर आती है। परिवार ने खिड़कियों को पॉलीथीन से ढका हुआ है क्योंकि कांच टूट चुके हैं।

गांव में एक लकड़ी की किराने की दुकान पूरी तरह जलकर राख हो गई थी, जिसके अब सिर्फ कुछ जले हुए टुकड़े ही बचे हैं। पास ही एक सब्जी बेचने वाले की दुकान का लोहे का शटर भी गोलियों के निशानों से भरा हुआ है। सरकार की तरफ से परिवार को 1.3 लाख रुपये की राहत राशि (Relief Money) दी गई है, लेकिन लोग इसे नाकाफी मानते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए नुकसान का विवरण

विवरण जानकारी
ऑपरेशन का नाम Operation Sindoor
तारीख 7 मई 2025
मुख्य प्रभावित क्षेत्र Bandi Village, Uri (Kashmir)
मृतक नागरिक Nargis Bano (1 महिला)
सरकारी राहत राशि 1.3 लाख रुपये
नुकसान घर, दुकानें, छत और खिड़कियां

नरगिस बानो की मौत और घायलों की स्थिति

Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में नरगिस बानो (Nargis Bano) नाम की महिला की जान चली गई थी। वह एक स्कॉर्पियो (Scorpio) गाड़ी में बैठकर सुरक्षित जगह जा रही थीं, तभी एक शेल पास में फटा। शेल का एक टुकड़ा गाड़ी को चीरते हुए उनके गले के पास लगा, जिससे उनकी मौत हो गई। गाड़ी में मौजूद अन्य लोग सुरक्षित बच गए थे। उरी में कुछ और लोग भी घायल हुए थे, जो अब ठीक हो चुके हैं।

अस्पताल में बंकर और सुरक्षा की मांग

गोलाबारी के डर को देखते हुए उरी के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल (Sub-District Hospital Uri) के लॉन में एक अंडरग्राउंड बंकर बनाया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब गोले अस्पताल के पास गिरे थे, तब मरीज और डॉक्टर बेड और टेबल के नीचे छिपने को मजबूर हो गए थे।

हालांकि, स्थानीय लोग इस नए बंकर के डिजाइन को लेकर चिंतित हैं। एक निवासी ने बताया कि बंकर का दरवाजा सीधे LoC (Line of Control) की तरफ खुलता है। अगर कोई गोला सीधे गेट पर गिरा, तो यह खतरनाक हो सकता है। लोग अब रिहायशी इलाकों में और भी ज्यादा सुरक्षित बंकरों (Civilian Bunkers) की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

Operation Sindoor के दौरान कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा था। आज भी जब बादल गरजते हैं, तो उरी के बच्चों और बड़ों को वही पुरानी गोलाबारी की रात याद आ जाती है।

FAQs

Question 1: ऑपरेशन सिंदूर कब शुरू हुआ था?

ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को कश्मीर में एक आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था।

Question 2: उरी में गोलाबारी के दौरान किस नागरिक की मौत हुई थी?

पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी में नरगिस बानो नाम की महिला की मौत हुई थी, जब वह स्कॉर्पियो गाड़ी से जा रही थीं।

Question 3: सरकार ने प्रभावित परिवारों को कितनी आर्थिक मदद दी?

इनपुट के अनुसार, प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से 1.3 लाख रुपये की राहत राशि दी गई है।

Question 4: उरी के अस्पताल में बंकर को लेकर क्या चिंता है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के बंकर का दरवाजा LoC की तरफ है, जिससे सीधा हमला होने का खतरा बना रहता है।

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