Delhi Private School Rules: सीएम रेखा गुप्ता की स्कूलों को चेतावनी, अब यूनिफॉर्म और किताबों के लिए नहीं कर सकेंगे मजबूर
दिल्ली की मुख्यमंत्री (CM) रेखा गुप्ता ने प्राइवेट स्कूलों को एक सख्त चेतावनी (Warning) जारी की है। उन्होंने कहा है कि स्कूल अब पेरेंट्स को किसी खास दुकान या वेंडर से यूनिफॉर्म, किताबें और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यह फैसला पेरेंट्स की शिकायतों के बाद लिया गया है, जिसमें कहा गया था कि स्कूल महंगे दामों पर सामान बेच रहे हैं।
Directorate of Education (DoE) के नए निर्देश
2 अप्रैल को Directorate of Education (DoE) ने एक बहुत ही सख्त निर्देश जारी किया था। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों द्वारा पेरेंट्स का शोषण (Exploitation) रोकना है। सरकार ने साफ कर दिया है कि स्कूल अपनी मर्जी से पेरेंट्स पर किसी खास वेंडर का दबाव नहीं बना सकते।
सरकार ने स्कूलों के काम करने के तरीके को लेकर भी नियम याद दिलाए हैं। दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों को ‘no profit, no loss’ के आधार पर चलना होगा। इसका मतलब है कि स्कूल केवल अपने खर्चों को पूरा करने के लिए काम करेंगे और कोई एक्स्ट्रा प्रॉफिट नहीं कमाएंगे।
यूनिफॉर्म और स्टेशनरी को लेकर सख्त नियम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि अब स्कूल हर साल अपनी यूनिफॉर्म का डिजाइन या रंग नहीं बदल पाएंगे। एक बार यूनिफॉर्म फाइनल होने के बाद, उसे कम से कम 3 साल तक बदलना नहीं होगा। इसके अलावा, स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर यह जानकारी देनी होगी कि पेरेंट्स कहीं से भी सामान खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।
स्कूलों के लिए कुछ मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
| नियम का विषय | सरकार का निर्देश (Guidelines) |
|---|---|
| यूनिफॉर्म का बदलाव | कम से कम 3 साल तक यूनिफॉर्म नहीं बदली जा सकती। |
| वेंडर का चुनाव | पेरेंट्स किसी भी दुकान से सामान खरीदने के लिए आजाद हैं। |
| दुकानों के विकल्प | अगर स्कूल सुझाव देना चाहता है, तो उसे कम से कम 5 से 6 दुकानों की लिस्ट देनी होगी। |
| सूचना का प्रदर्शन | नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर ‘फ्री टू बाय’ का मैसेज लिखना अनिवार्य है। |
| काम करने का मॉडल | स्कूल ‘no profit, no loss’ के आधार पर चलेंगे। |
सीएम की सख्त चेतावनी और औचक निरीक्षण
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह दिल्ली के किसी भी प्राइवेट स्कूल में कभी भी औचक निरीक्षण (Inspection) के लिए जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक दिखावा नहीं है, बल्कि नियमों को लागू करने की एक कड़ी कार्रवाई है।
सीएम ने कहा कि अगर किसी भी स्कूल में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सरकार उस स्कूल को अपने कब्जे (Take over) में भी ले सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन नियमों का पालन पूरी सख्ती से कराया जाए।
पेरेंट्स की शिकायतें और सोशल मीडिया का असर
हाल ही में कई शहरों के पेरेंट्स ने स्कूल की किताबों और सामानों पर होने वाले भारी खर्च को लेकर आवाज उठाई थी। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति क्लास 2 की किताबों के लिए 9000 रुपये खर्च करने की बात कर रहा था। पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल नोटबुक, बैग, बेल्ट और जूतों जैसी चीजों को बाजार से बहुत ज्यादा कीमतों पर बेच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि अब “Single-vendor diktat” यानी एक ही दुकान से सामान खरीदने का आदेश नहीं चलेगा। पेरेंट्स की सुविधा के लिए स्कूल विकल्प दे सकते हैं, लेकिन किसी भी तरह की जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
FAQs
क्या स्कूल हर साल यूनिफॉर्म बदल सकते हैं?
नहीं, नए नियमों के अनुसार स्कूल कम से कम 3 साल तक यूनिफॉर्म के डिजाइन या रंग में बदलाव नहीं कर सकते।
क्या मुझे स्कूल द्वारा बताई गई दुकान से ही किताबें खरीदनी होंगी?
नहीं, आप अपनी पसंद की किसी भी दुकान से किताबें और स्टेशनरी खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। स्कूल आप पर दबाव नहीं बना सकता।
अगर स्कूल नियमों का पालन नहीं करता है तो क्या होगा?
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ दिल्ली सरकार सख्त कार्रवाई करेगी और जरूरत पड़ने पर स्कूल का मैनेजमेंट भी अपने हाथ में ले सकती है।