क्या डूब जाएंगे काव्या मारन के करोड़ों? अबरार अहमद और PCB की चाल ने फंसाया SRH को!
क्रिकेट जगत में एक बड़ा विवाद इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है, जिसका केंद्र बिंदु हैं काव्या मारन की सनराइजर्स लीड्स और पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद। ‘द हंड्रेड’ लीग में अबरार अहमद की खरीददारी ने कई सवाल खड़े किए थे, और अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की एक चाल ने सनराइजर्स लीड्स के करोड़ों रुपये पर संकट खड़ा कर दिया है। ऐसा लग रहा है कि SRH द्वारा खर्च किए गए पैसे डूब सकते हैं, क्योंकि इंटरनेशनल कमिटमेंट के कारण अबरार अहमद का खेलना मुश्किल लग रहा है।
काव्या मारन की ‘द हंड्रेड’ में बड़ी डील और विवाद
काव्या मारन की फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने ‘द हंड्रेड’ के ऑक्शन में पाकिस्तान के अबार अहमद को खरीदकर सबको चौंका दिया था। Cricket Auction में यह डील 190,000 पाउंड में हुई, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1 करोड़ 34 लाख रुपये होते हैं। इस खरीद पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ, क्योंकि नीलामी से पहले यह माना जा रहा था कि भारतीय फ्रेंचाइजी किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को नहीं खरीदेंगी। अबार अहमद वही खिलाड़ी हैं जो अपने बॉलिंग एक्शन के बाद विकेट मिलने पर भारत को चिढ़ाते हुए आंखें दिखाते आए हैं। इस खरीददारी पर काव्या मारन से काफी नाराजगी भी जाहिर की गई थी।
अबरार अहमद का ‘द हंड्रेड’ से बाहर होने का खतरा
अब पीसीबी की एक चाल ने सनराइजर्स लीड्स को मुश्किल में डाल दिया है। अबरार अहमद शायद ही ‘द हंड्रेड’ में खेल पाएं, और इसकी वजह बेहद चौंकाने वाली है – इंटरनेशनल कमिटमेंट। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) उन्हें ‘द हंड्रेड’ के लिए एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं देगा। बिना एनओसी के कोई भी खिलाड़ी किसी लीग में नहीं खेल सकता। हर बोर्ड पहले देश के लिए खेलने को प्राथमिकता देता है, और उसके बाद ही फ्रेंचाइजी क्रिकेट की अनुमति देता है। यह स्थिति अब अबरार अहमद के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। Cricket League में उनकी भागीदारी अधर में लटक गई है।
पाकिस्तान और वेस्टइंडीज सीरीज बनाम द हंड्रेड
समस्या की जड़ इंटरनेशनल क्रिकेट कैलेंडर में तारीखों का टकराव है। ‘द हंड्रेड’ का कार्यक्रम 21 जुलाई से 16 अगस्त तक निर्धारित है। वहीं, इसी अवधि में पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच 15 जुलाई से 7 अगस्त तक एक महत्वपूर्ण सीरीज होनी है। इस दौरे पर पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे, जो आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का हिस्सा हैं। इंटरनेशनल कमिटमेंट को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि आईसीसी (ICC) के फिक्स्चर को निभाना हर खिलाड़ी और बोर्ड के लिए अनिवार्य होता है। International Cricket Calendar का यह टकराव सीधे तौर पर अबार अहमद की ‘द हंड्रेड’ में भागीदारी को प्रभावित कर रहा है।
करोड़ों रुपये का दांव और बीसीसीआई-ईसीबी की भूमिका
अगर अबरार अहमद नहीं खेल पाते हैं, तो सनराइजर्स लीड्स के लिए यह एक बड़ी वित्तीय क्षति होगी। ‘द हंड्रेड’ के नियमों के अनुसार, इंटरनेशनल कमिटमेंट के कारण पैसा रोकना या वापस लेना मुश्किल होता है। इस विवाद पर बीसीसीआई (BCCI) पर भी सवाल उठे थे, जिस पर बीसीसीआई ने साफ किया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने कहा कि उनका दायरा भारत और बीसीसीआई का है, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चीजों में वे हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
अब सवाल इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) पर उठ रहे हैं, क्योंकि ‘द हंड्रेड’ लीग ईसीबी के अंतर्गत आती है। ईसीबी पर सवाल है कि उन्होंने ऐसे पाकिस्तानी खिलाड़ियों को क्यों बुलाया, जिनके अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में पहले से मैच तय थे, खासकर जब भारतीय फ्रेंचाइजी भी इस लीग में शामिल हैं। अगर अबरार नहीं खेलते हैं, तो लीग को भले ही ज्यादा नुकसान न हो, लेकिन ईसीबी की प्रतिष्ठा पर सवाल जरूर उठेंगे। Cricket Investment के दृष्टिकोण से, यह सनराइजर्स लीड्स के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
फिलहाल, अबरार अहमद और पीसीबी के रिश्ते अच्छे बताए जाते हैं, इसलिए यह 50-50 की स्थिति है कि उन्हें एनओसी मिलेगी या नहीं। देखना दिलचस्प होगा कि पीसीबी सनराइजर्स लीड्स के पैसे डुबोता है या अबरार अहमद को खेलने की अनुमति देकर एनओसी जारी कर देता है।
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