T20 World Cup जीतने के बाद India में विवाद: Gautam Gambhir और Team India पर उठे सवाल

वर्ल्ड कप जीत: खुशी या घमासान?

पूरे देश ने वर्ल्ड कप जीतने का जश्न मनाया, लेकिन इसी जीत के बाद देश में एक नया घमासान शुरू हो गया है। टीम इंडिया ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और गौतम गंभीर की कोचिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए यह खिताब अपने नाम किया। Cricket victory की इस खुशी के बीच कुछ लोग अभी भी इस जीत को सकारात्मक रूप से नहीं देख रहे हैं।

मंदिर यात्रा और कीर्ति आजाद का तंज

टीम इंडिया के खिताब जीतने के बाद, कप्तान सूर्य कुमार यादव, कोच गौतम गंभीर और आईसीसी के मुखिया जय शाह वर्ल्ड कप की ट्रॉफी लेकर हनुमान मंदिर पहुंचे। इस घटना पर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाए। Religious sentiments को लेकर उन्होंने तंज कसा कि ऐसा क्यों किया गया, यह तो धर्म के साथ क्रिकेट को जोड़ना है। कीर्ति आजाद 1983 की वर्ल्ड कप विजेता टीम का भी हिस्सा थे।

गौतम गंभीर का मुंहतोड़ जवाब

कीर्ति आजाद के बयानों पर गौतम गंभीर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ बयानों को गंभीरता से लेने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वे सिर्फ खिलाड़ियों की उपलब्धि को कम करते हैं। गौतम गंभीर ने जोर दिया कि अगर कोई उन 15 खिलाड़ियों और बच्चों की कड़ी मेहनत और उनके प्रयासों को कम करना चाहता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के साथ ऐसा करना बिलकुल भी उचित नहीं है। Sportsmanship और खिलाड़ियों के सम्मान पर उन्होंने बात की।

कीर्ति आजाद का पलटवार: “धर्म नहीं, टीम जीती है”

गौतम गंभीर के जवाब के बाद, कीर्ति आजाद ने एक बार फिर अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को नीचा नहीं दिखाना चाहिए, और खिलाड़ियों को भी अपनी स्थिति को नीचा नहीं करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सबका सम्मान होना चाहिए। वर्ल्ड कप जीतने के बाद मंदिर जाना कोई पाप नहीं है, लेकिन वे इस बात पर जोर दे रहे थे कि इसे धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने 1983 की टीम का उदाहरण दिया, जिसमें अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी थे – जैसे हिंदुओं में वे खुद, मुस्लिम में किरमानी, सिख में बलविंदर संधू, ईसाई में रॉजर बिन्नी। उन्होंने कहा कि संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी क्रिश्चियन के रूप में नहीं, बल्कि एक खिलाड़ी के रूप में खेलते हैं। जीत Team spirit की होती है, किसी धर्म की नहीं, बल्कि भारतीय टीम की होती है।

संजू सैमसन और शुभमन गिल पर सवाल, अगरकर-गंभीर में अनबन?

इस विवाद के बीच, पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने भी गौतम गंभीर पर निशाना साधा। उन्होंने गंभीर पर आरोप लगाया कि उन्होंने संजू सैमसन को पर्याप्त मौके नहीं दिए और शुभमन गिल को उनसे पहले खिलाते रहे, जबकि गिल को एशिया कप में सेट होने का मौका भी नहीं मिला। एक रिपोर्ट के अनुसार, अजीत अगरकर और गौतम गंभीर के बीच भी अनबन थी। गंभीर लगातार शुभमन गिल को टीम में मौका देना चाहते थे, लेकिन अगरकर असहमत थे क्योंकि वे टी20 में कुछ और चाहते थे। अगरकर ने ईशान किशन और रिंकू सिंह को चुना, जबकि गंभीर गिल को वर्ल्ड कप टीम में चाहते थे। Player selection और टीम प्रबंधन पर यह विवाद गहराया।

जीत पर सवाल: क्या ये क्रिकेट के लिए अच्छा है?

एक तरफ देश ने लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जैसी बड़ी जीत हासिल की है, और दूसरी तरफ इस ऐतिहासिक जीत पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यह स्थिति Indian cricket के लिए ठीक नहीं है। ऐसे समय में जब हर खिलाड़ी को जिसने देश का प्रतिनिधित्व किया है, उसे समर्थन मिलना चाहिए, उन पर सवाल दागे जा रहे हैं। हर उस खिलाड़ी की जीत में भागीदारी है जिसने देश के लिए क्रिकेट खेला है। अब देखना यह है कि इस जीत पर और कितने सवाल उठाए जाते हैं।

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