टॉप करने के बावजूद वर्ल्ड कप से बाहर, हारने के बाद भी फाइनल में अंदर: क्या है ICC का यह अजब Super 8 फॉर्मेट?
टॉप करके भी वर्ल्ड कप से दो टीमें बाहर हो गईं, वहीं हारकर भी दो टीमें फाइनल में पहुंच गईं। यह कैसा फॉर्मेट है? Super Eight के इस प्रारूप पर बवाल मच गया है। ICC को लगातार कटघरे में खड़ा किया जा रहा है और उससे सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या भांग पीकर ICC ने यह सुपर 8 का फॉर्मेट बनाया था? ICC tournament format
यह कैसा फॉर्मेट है भाई, जिसमें दो टॉप करने वाली टीमें सेमीफाइनल तक में जगह नहीं बना पाएंगी और बाहर हो जाएंगी? वहीं, लिटरली हारने वाली दो टीमें फाइनल तक पहुंच जाएंगी। यह कैसी स्थिति है? Cricket tournament rules
प्रीडिसाइडेड सीडिंग प्रणाली (Pre-decided Seeding System)
दरअसल, इस बार सुपर एट का फॉर्मेट प्रीडिसाइडेड था। पहले से ही ग्रुप्स की सीडिंग कर दी गई थी। सीडिंग का मतलब यह होता है कि ICC यह तय कर देता है कि सुपर एट में कौन सी टीम किस नंबर पर रहेगी, भले ही वह नंबर वन पर फिनिश करे या नंबर टू पर। लेकिन, सीडिंग पहले से कर दी गई थी और इसी प्री-सीडिंग प्रणाली ने अनजाने में सुपर एट ग्रुप्स में भारी असंतुलन (heavy imbalance) पैदा कर दिया है। एक ग्रुप ज्यादा मजबूत है तो दूसरा कमजोर। Cricket seeding system
टीमों को निश्चित स्लॉट का आवंटन (Allocation of Fixed Slots to Teams)
ICC ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टॉप टीमों को निश्चित स्लॉट आवंटित कर दिए थे। उदाहरण के लिए, इंडिया टीम अगर सुपर एट में पहुंचती है, तो उसे X1 स्लॉट दिया जाएगा। इंडिया ग्रुप A में थी जिसमें पाकिस्तान, नीदरलैंड, यूएसए, नामीबिया जैसी टीमें थीं। इसमें पहले से तय कर दिया गया था कि इंडिया अगर सुपर एट में पहुंचेगी तो उसे X1 स्लॉट दिया जाएगा। उसके बाद उस X1 का जो मैच है, वह एक X2 से होगा, X3 से होगा और X4 से होगा। Tournament group stage
इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया को X2, वेस्टइंडीज को X3, साउथ अफ्रीका को X4 और इंग्लैंड को Y1 (यानी दूसरे वाले ग्रुप से नंबर वन टीम) सेट किया गया था। ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में बाहर हो गई, इसलिए उनकी जगह क्वालीफाई करने वाली जिम्बाब्वे को X2 स्लॉट दिया गया। इसी वजह से ग्रुप A में X1 इंडिया, X2 जिम्बाब्वे, X3 वेस्टइंडीज और X4 साउथ अफ्रीका जैसी टीमें आ गईं। और इसी वजह से, नंबर वन ग्रुप बी में नंबर वन होने के बावजूद, जिम्बाब्वे सुपर एट के ग्रुप वन में शामिल हुई (यानी इंडिया वाले ग्रुप में शामिल हुई), जबकि कायदे से उसे साम्य वाले ग्रुप में शामिल होना था। Cricket league format
ग्रुप्स का असंतुलित विभाजन (Imbalanced Group Division)
इस सीडिंग के कारण ग्रुप वन में सभी चार वो टीमें शामिल हो गईं जो अपने-अपने ग्रुप से टॉप पर थीं। वहीं, ग्रुप टू में सारी रनर-अप टीमें शामिल हुईं। जैसे पाकिस्तान (जो अपने ग्रुप से रनर-अप थी), श्रीलंका (जो अपने ग्रुप D से रनर-अप थी), इंग्लैंड (जो अपने ग्रुप C से रनर-अप थी) और न्यूजीलैंड (जो अपने ग्रुप D से रनर-अप थी)। तो यह हारकर भी चार टीमें जो रनर-अप थीं, वे एक ग्रुप में हो गईं, और अपने-अपने ग्रुप से टॉप करने वाली टीमें दूसरे ग्रुप में।
प्री-सीडिंग के नुकसान (Disadvantages of Pre-seeding)
इस प्री-सीडिंग का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि दो टॉप की टीमें सेमीफाइनल से पहले ही बाहर हो जाएंगी। चूंकि एक ग्रुप में चारों टॉप की टीमों को रखा गया है, जाहिर है उसमें से केवल दो ही सेमीफाइनल में पहुंचेंगी और दो बाहर हो जाएंगी। और यह देखिए कितना खराब फॉर्मेट बनाया गया है कि दूसरी ओर, हारने वाली (रनर-अप) टीमों में से दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगी और उनके पास फाइनल में पहुंचने का भी मौका रहेगा। यह लीग स्टेज में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों के लिए एक खामियाजा है। Tournament fairness concerns
इस प्री-सीडिंग का एक और खामियाजा श्रीलंका को भुगतना पड़ा है। श्रीलंका अभी अपने देश में मैच खेल रही है, लेकिन सेमीफाइनल होने पर उसे इंडिया आकर खेलना होगा। पाकिस्तान अगर पहुंच गई तो वह कोलंबो में ही खेलेगी। यह बात समझ से परे है, खासकर जब श्रीलंका एक होस्ट कंट्री है।
यह फॉर्मेट सबके लिए समझ से परे है। इसी वजह से सब ICC से सवाल पूछ रहे हैं कि यार यह कैसा फॉर्मेट है कि टॉप करके भी दो टीमें बाहर और हारकर भी दो टीमें फाइनल में। ICC को ऐसे बड़े टूर्नामेंट्स के फॉर्मेट सोच-समझकर बनाने चाहिए थे। Sports event controversies
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