वर्ल्ड कप के बीच क्रिकेट जगत में मातम: मैदान पर अंपायर की दुखद मौत, वजह ने चौंकाया
इस समय T20 वर्ल्ड कप का रोमांच हर क्रिकेट प्रेमी के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन इस उत्साह के बीच क्रिकेट जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जिसने पूरे खेल जगत को सदमे में डाल दिया है। भारत में खेले जा रहे इस क्रिकेट महाकुंभ के दौरान ही एक अंपायर की मैदान पर मौत हो गई।
मैदान पर अंपायर की मौत: एक दुखद घटना
जी हां, आपने सही सुना, क्रिकेट मैच के दौरान अंपायरिंग करते हुए एक अंपायर ने अपनी जान गंवा दी। यह घटना शुक्लागंज कस्बे के सप्रू मैदान में उस समय घटी जब केसीए की ओर से केडीएमए लीग मैच का आयोजन किया जा रहा था। मृतक अंपायर की पहचान 65 वर्षीय मानिक गुप्ता के रूप में हुई है। यह World Cup tragedy ने सभी को हैरान कर दिया है।
मधुमक्खी हमले ने ले ली जान
यह हादसा तब हुआ जब 65 वर्षीय अंपायर मानिक गुप्ता, अंडर-13 के एक मैच में अंपायरिंग करने के बाद, दूसरे अंपायर जगदीश का मैदान पर घर जाने के लिए इंतजार कर रहे थे। जगदीश उस समय वाईएमसी और पैरामाउंट के बीच चल रहे एक अन्य मैच में अंपायरिंग कर रहे थे। इसी दौरान, अचानक मधुमक्खियों के एक बड़े झुंड ने हमला कर दिया। मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए खिलाड़ी तुरंत मैदान पर लेट गए, जबकि मानिक गुप्ता के साथ खड़े एक अन्य अंपायर नावेद बाथरूम में चले गए।
मधुमक्खियों ने मानिक गुप्ता और जगदीश को घेर लिया। जगदीश तो किसी तरह बच निकलने में कामयाब रहे, लेकिन मानिक गंभीर रूप से घायल हो गए। लगभग 10 मिनट तक अंपायर मानिक गुप्ता मधुमक्खियों के हमले से घिरे रहे। उनकी 65 वर्ष की आयु के कारण, वे अन्य खिलाड़ियों और अंपायरों की तरह भागने में असमर्थ रहे, जिन्होंने अपनी जान बचाई। हमले के बाद, उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने उन्हें आगे के इलाज के लिए रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, पहले हेल्थ और फिर कार्डियोलॉजी ले जाने के बाद, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह एक अप्रत्याशित field incident था।
मानिक गुप्ता: एक भावुक अंपायर
मानिक गुप्ता कानपुर क्रिकेट एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अंपायर थे, और उन्हें अंपायरिंग से बेहद प्यार था। 65 वर्ष की आयु में भी उनका यह जुनून देखते ही बनता था। उन्हें अपने अंपायर होने पर बहुत गर्व था और वे अंपायर की पोशाक से विशेष लगाव रखते थे। उनके साथियों ने बताया कि अंपायर की ड्रेस पहनते ही वे केवल सच्चाई और ईमानदारी की बात करते थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस पेशे और पोशाक से उन्हें इतना प्रेम था, उसी में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। वे पहले एक क्रिकेटर भी थे, लेकिन बाद में उन्होंने professional umpiring को अपना पेशा बना लिया था। मानिक गुप्ता हृदय रोग से भी पीड़ित थे, जो उनकी भागने में असमर्थता का एक कारण हो सकता है।
सुरक्षा और सावधानी की आवश्यकता
यह दुखद घटना हमें एक महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि मैदान पर सुरक्षा और सावधानी के उपाय कितने आवश्यक हैं। यदि क्रिकेट खेलते समय या अंपायरिंग करते समय आसपास मधुमक्खियों का झुंड या छत्ता दिखाई दे, तो तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए। प्रीकॉशनरी मेजर्स लेना बेहद जरूरी है ताकि ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और sports venue safety सुनिश्चित की जा सके।
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