India Cash Demand: भारत में कैश की मांग रिकॉर्ड स्तर पर, 2017 के बाद सबसे ज्यादा बढ़ी करेंसी इन सर्कुलेशन
भारत में लोगों के बीच कैश (Cash) के इस्तेमाल की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। 5 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने के पहले 15 दिनों में ही करेंसी इन सर्कुलेशन (Currency in Circulation – CIC) में 61,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था में कैश की बढ़ती जरूरत को साफ दर्शाता है।
करेंसी इन सर्कुलेशन का कुल आंकड़ा अब 42.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि अगर कैश की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो इससे बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी (Liquidity) यानी नकदी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
नोटबंदी के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी
आरबीआई (RBI) के डेटा के अनुसार, कैश विड्रॉल में सालाना आधार पर 11.8% की ग्रोथ देखी गई है। साल 2017 की शुरुआत में हुई नोटबंदी (Demonetisation) के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। पिछले छह महीनों और पिछले पूरे फाइनेंशियल ईयर के दौरान कैश की डिमांड में लगातार इजाफा देखने को मिला है।
| विवरण (Details) | आंकड़े (Figures) |
|---|---|
| अप्रैल के पहले 15 दिनों में बढ़ोतरी | 61,000 करोड़ रुपये से अधिक ($6.40 billion) |
| कुल करेंसी इन सर्कुलेशन (Total CIC) | 42.3 लाख करोड़ रुपये |
| सालाना ग्रोथ रेट (Annual Growth Rate) | 11.8% |
| पिछला रिकॉर्ड स्तर | शुरुआत 2017 (नोटबंदी के बाद) |
कैश की मांग बढ़ने के मुख्य कारण
अर्थशास्त्रियों ने कैश की डिमांड बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण बताए हैं:
- ग्रामीण मांग (Rural Demand): गांवों में कैश का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे करेंसी की मांग में तेजी आई है।
- GST में कटौती: सितंबर महीने में कई रोजमर्रा की चीजों पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कम किया गया था, जिससे खरीदारी बढ़ी और कैश की जरूरत भी बढ़ी।
- कम ब्याज दरें (Lower Interest Rates): ब्याज दरें कम होने की वजह से भी लोगों ने कैश का इस्तेमाल ज्यादा किया है।
- कीमती धातुओं के दाम: सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों की वजह से भी मार्केट में कैश का सर्कुलेशन बढ़ा है।
बैंकिंग सिस्टम और लिक्विडिटी पर असर
बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी को बनाए रखना सेंट्रल बैंक के लिए एक चुनौती बन सकता है। आरबीआई का लक्ष्य लिक्विडिटी को डिपॉजिट के 0.6% से 1.1% के बीच रखना होता है। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में लिक्विडिटी सरप्लस औसतन 1% रह सकता है, जो दूसरी छमाही में गिरकर 0.5% तक आ सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय
विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर अपनी राय दी है:
| एक्सपर्ट का नाम | संस्था (Organization) | मुख्य बात |
|---|---|---|
| अभिषेक उपाध्याय | ICICI Securities Primary Dealership | ग्रामीण मांग में मजबूती से कैश की मांग बढ़ी है। |
| सौम्य कांति घोष | State Bank of India (SBI) | कम ब्याज दरों और सोने-चांदी की रीसाइक्लिंग से कैश सर्कुलेशन बढ़ा है। |
| साक्षी गुप्ता | HDFC Bank | महंगाई और राज्यों के चुनाव लिक्विडिटी को और कम कर सकते हैं। |
| धीरज निम | ANZ | आरबीआई डिविडेंड से मदद मिलेगी, लेकिन CIC लिक्विडिटी को कम करेगा। |
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई (Inflation) बढ़ती है या आने वाले समय में राज्यों में चुनाव होते हैं, तो कैश की डिमांड और भी बढ़ सकती है। इससे बैंकों के पास मौजूद नकदी के बैलेंस में कमी आ सकती है। आरबीआई लगातार सिस्टम में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए कदम उठा रहा है, लेकिन करेंसी इन सर्कुलेशन का बढ़ना एक बड़ा फैक्टर साबित हो रहा है।
FAQs
1. भारत में वर्तमान में कुल कितनी करेंसी सर्कुलेशन में है?
अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल करेंसी इन सर्कुलेशन (CIC) 42.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
2. कैश की मांग में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
कैश विड्रॉल में सालाना आधार पर 11.8% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2017 के बाद सबसे ज्यादा है।
3. कैश की डिमांड बढ़ने का आम लोगों पर क्या असर होगा?
कैश की ज्यादा डिमांड से बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) कम हो सकती है, जिससे बैंकों के पास लोन देने के लिए फंड की स्थिति प्रभावित हो सकती है।