एलएसजी बनाम एसआरएच मैच विवाद: मैदान पर बेईमानी और अंपायरों की बड़ी चूक! जानें ICC का नियम और डेड बॉल
एलएसजी (LSG) और एसआरएच (SRH) के बीच हुए मैच में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मैदान पर हुई एक घटना ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह मैच दोबारा होना चाहिए? आइए जानते हैं इस पूरे LSG vs SRH match controversy और आईसीसी (ICC) के नियमों के बारे में।
क्या था पूरा विवाद?
लखनऊ सुपर जाइंट्स (LSG) को मैच जीतने के लिए दो गेंदों में सिर्फ एक रन की जरूरत थी। उस समय ऋषभ पंत बल्लेबाजी कर रहे थे और खलील अहमद गेंदबाजी कर रहे थे। खलील की गेंद पर ऋषभ पंत ने एक जोरदार शॉट खेला, और गेंद बाउंड्री की तरफ जा रही थी। तभी बाउंड्री के पार खड़े आवेश खान ने, जिनके हाथ में बैट था, गेंद को बैट से मार दिया। यह घटना तब हुई जब गेंद बाउंड्री पार नहीं हुई थी। एलएसजी के चार खिलाड़ी मैदान पर खड़े थे, और आवेश खान ने गेंद को वापस अंदर की तरफ धकेल दिया। इस घटना से यह साफ हो गया कि गेंद कभी भी बाउंड्री पार नहीं हुई, और लखनऊ सुपर जाइंट्स को न तो चौका मिला और न ही उन्होंने दौड़कर कोई रन लिया। यानी, लखनऊ सुपर जाइंट्स का स्कोर 156 ही था। यह पूरा वाकया cricket rules explained के तहत गंभीर सवाल खड़े करता है।
ICC का नियम क्या कहता है?
आईसीसी के नियमों के अनुसार, एमसीसी (MCC) लॉ 20.4.2 के तहत यह गेंद ‘डेड बॉल’ (Dead Ball) मानी जाएगी। आवेश खान ने जो किया वह ‘डेड बॉल’ की श्रेणी में आता है। क्रिकेट के नियमों के हिसाब से, इस गेंद को तुरंत ‘डेड बॉल’ घोषित किया जाना चाहिए था और मैच को उसी समय रोक देना चाहिए था। नियम कहता है कि यदि मैदान से बाहर का कोई व्यक्ति मैच में या गेंद को छूकर दखल देता है, तो वह गेंद ‘डेड बॉल’ होती है। इस मामले में, आवेश खान उस समय न तो बल्लेबाजी कर रहे थे और न ही फील्डिंग साइड का हिस्सा थे; वे मैदान के बाहर खड़े थे। इसके अलावा, बल्लेबाजी टीम के खिलाड़ी द्वारा गेंद को रोका गया, हालांकि आवेश खान बाउंड्री के बाहर थे। यह सीधे तौर पर dead ball rule का उल्लंघन था। यह घटना सीधे तौर पर ICC cricket rules का उल्लंघन करती है।
अंपायरों और फील्डिंग टीम की चूक
यह आश्चर्य की बात है कि मैदान पर मौजूद दो अंपायर, और अंदर एसी कमरे में बैठे थर्ड अंपायर, किसी को भी इस बात पर ध्यान क्यों नहीं आया। ऐसा लगता है जैसे तीनों अंपायर सो रहे थे। एसआरएच के फील्डरों, उनके कप्तान और थर्ड अंपायर को तुरंत इस मामले में जागना चाहिए था और मैच को वहीं रुकवाना चाहिए था। लखनऊ सुपर जाइंट्स के सेलिब्रेशन को भी तुरंत रोका जाना चाहिए था, क्योंकि आधिकारिक तौर पर यह गेंद ‘डेड बॉल’ थी। फील्डिंग टीम ने भी इस पर तुरंत शिकायत क्यों नहीं की? यह उनकी भी एक बड़ी गलती थी। यदि अंपायर और फील्डिंग टीम उसी समय कार्रवाई करते, तो आवेश खान की इस बेवकूफी के लिए लखनऊ सुपर जाइंट्स को इसका परिणाम भुगतना पड़ता। मैच को दोबारा शुरू करवाया जाता और उन दो गेंदों को दोबारा करवाया जाता, जिससे शायद मैच का नतीजा कुछ भी हो सकता था। यह एक बड़ी umpire decision controversy है। सभी को cricket match rules का पालन करना चाहिए था।
निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर, यह साफ है कि अंपायरों से भारी चूक हुई, फील्डिंग साइड से भी गलती हुई, और आवेश खान ने तो बहुत बड़ी गलती की। लखनऊ सुपर जाइंट्स इस मामले में भाग्यशाली रही क्योंकि अंपायर मैदान पर ध्यान नहीं दे रहे थे और फील्डिंग टीम ने इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया। आईसीसी के MCC Law 20.4.2 के तहत इस मैच की दो गेंदें निश्चित रूप से दोबारा करवाई जानी चाहिए थीं।
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