अनुराग ठाकुर पर BCCI से लगा बैन सुप्रीम कोर्ट ने हटाया: एक बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने BCCI अध्यक्ष और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर को BCCI से जुड़े एक मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साल 2017 के अपने उस आदेश में संशोधन किया है, जिसमें पूर्व BCCI अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को आजीवन BCCI से संबंधित किसी भी कामकाज से जुड़े रहने से मना किया गया था। यह फैसला भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के लिए एक बड़ी खुशखबरी है।
9 साल के लंबे इंतजार के बाद मिली राहत यह मामला लंबे समय से कोर्ट में pending in court पड़ा हुआ था। 9 साल के लंबे इंतजार के बाद अनुराग ठाकुर के पक्ष में इस फैसले को सुनाया गया है। साल 2017 में अनुराग ठाकुर जब BCCI अध्यक्ष थे, तब कोर्ट में बोर्ड से जुड़े किसी भी मामलों में हिस्सा लेने से रोक लगाई गई थी।
बिना पक्ष सुने सुनाया गया था फैसला उस समय सभी को हैरानी हुई थी क्योंकि कोर्ट ने यह फैसला अनुराग ठाकुर को बिना सुने दिया था। यानी कि उनके ऊपर फैसला सुना दिया गया लेकिन अनुराग ठाकुर को एक बार भी अपना पक्ष रखने या अपनी दलील रखने का कोई मौका नहीं दिया गया था। अचानक एक सुबह फैसला आता है और उन्हें हटा दिया जाता है। कोई सुनवाई नहीं हुई, उन्हें बुलाया नहीं गया, उनसे उनका जवाब नहीं मांगा गया, उनसे उनका पक्ष नहीं मांगा गया। जनवरी 2017 में उन्हें अपने पद से हटा दिया गया और यह भी कहा गया कि आप आगे बोर्ड से जुड़े किसी भी मामले में नहीं जुड़ सकते। कोर्ट ने तब के BCCI अध्यक्ष को अपना पक्ष रखने तक का मौका नहीं दिया था, और ना ही उनकी तरफ से इस मामले में कोई अपीयर हो पाया था।
सच्चाई की जीत और बड़ी राहत हालांकि, हमेशा कहा जाता है कि हिंदुस्तान में सच्चाई की जीत होगी और अगर आप गलत नहीं हैं तो आप विजय जरूर होंगे। अब हम यह कह सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का यह सर्वोच्च फैसला अनुराग ठाकुर की एक बहुत बड़ी जीत है। BCCI के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से अब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर को पूरी तरह से relief and good news मिल चुकी है। कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर BCCI में कोई भी पद संभालने या काम करने से लगे बैन को हटा दिया है। यह दिखाता है कि justice prevailed.
अब BCCI में वापसी का रास्ता साफ़ इसका सीधा मतलब यह है कि अब अनुराग ठाकुर एक बार फिर BCCI में आ सकते हैं। वे हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में आ सकते हैं और BCCI में एक बार फिर कोई ना कोई पद संभाल सकते हैं। यह उनके लिए cricket administration में वापसी का रास्ता खोलता है।
BCCI में अनुराग ठाकुर का शानदार कार्यकाल जब अनुराग ठाकुर BCCI के अध्यक्ष, सचिव या जॉइंट सेक्रेटरी रहे, उस दौरान BCCI की फंक्शनिंग बहुत ही शानदार रही थी। उनके कार्यकाल में बड़े-बड़े टूर्नामेंट्स होस्ट हुए, जिसमें भारत में 2016 T20 वर्ल्ड कप भी होस्ट हुआ था। ऐसे में एक इतने दमदार और hardworking leader को 9 साल तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा। हिमाचल का धर्मशाला स्टेडियम, जो एक समय पूरा पहाड़ था, आज अगर वहां पर क्रिकेट स्टेडियम है तो उसका क्रेडिट सिर्फ और सिर्फ एक शख्स को जाता है और उनका नाम है अनुराग ठाकुर। यह उनकी sports leadership का प्रमाण है।
कोर्ट ने कहा, “आजीवन बैन नहीं था” इस मामले को लेकर अनुराग ठाकुर की ओर से सुप्रीम कोर्ट से साल 2017 में लगाए बैन को हटाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में जज ने कहा कि साल 2017 में लगाया बैन जिंदगी भर के लिए नहीं था। जी हां, सुप्रीम कोर्ट के जज ने साफ कहा कि आजीवन बैन नहीं था और अब इस बैन को आगे जारी रखना ठीक नहीं है। कोर्ट से मिली राहत के बाद अब अनुराग ठाकुर BCCI के नियमों के अनुसार उसके कामकाज में हिस्सा ले सकते हैं और क्रिकेट एसोसिएशन में वापस आ सकते हैं। यह एक महत्वपूर्ण legal precedent है।
क्रिकेट जगत को वापसी का इंतज़ार BCCI में अनुराग ठाकुर की लंबी पारी रही है; वे जॉइंट सेक्रेटरी, सचिव और प्रेसिडेंट रहे हैं, और उनके कार्यकाल में बड़े ही दमदार फैसले लिए गए हैं। अब कोर्ट से उनको राहत मिल गई है, और सभी क्रिकेट प्रशंसक उनकी क्रिकेट के मैदान पर या क्रिकेट एसोसिएशन में वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि वे हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को जिस ऊंचाइयों तक लेकर गए, एक बार फिर वापस आएं, हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का काम संभालें और फिर जब सही समय हो तब BCCI में भी आएं और BCCI को भी नई बुलंदियों पर लेकर जाएं। यह sports governance में उनकी वापसी का इंतजार है।
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