SpiceJet vs Kalanithi Maran: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट की याचिका खारिज की, 144 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने स्पाइसजेट (SpiceJet) और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) अजय सिंह की एक रिव्यू पिटीशन (Review Petition) को खारिज कर दिया है। यह मामला कलानिधि मारन और कल एयरवेज (Kal Airways) के साथ चल रहे 144 करोड़ रुपये के विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने न केवल याचिका खारिज की, बल्कि स्पाइसजेट पर 50,000 रुपये का जुर्माना (Cost) भी लगाया है।
कोर्ट ने कैश डिपॉजिट के बदले प्रॉपर्टी लेने से किया इनकार
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद (Justice Subramonium Prasad) की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। स्पाइसजेट ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें 144 करोड़ रुपये नकद जमा करने के बजाय गुरुग्राम में स्थित एक प्रॉपर्टी को गारंटी के तौर पर रखने की अनुमति दी जाए। यह प्रॉपर्टी अजय सिंह के नाम पर है। हालांकि, कोर्ट ने इस रिक्वेस्ट को मानने से साफ इनकार कर दिया।
स्पाइसजेट ने दी आर्थिक तंगी की दलील
सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और अमित सिबल पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एयरलाइन इस समय आर्थिक तंगी (Financial Constraints) का सामना कर रही है। उनके लिए 144 करोड़ रुपये की भारी रकम जमा करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि गुरुग्राम की प्रॉपर्टी, जिस पर कोई कर्ज नहीं है (Unencumbered), उसे डिपॉजिट के बदले स्वीकार किया जाए।
वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि पिछले आदेश में कुछ गलतियां थीं। उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह मानना गलत था कि सुप्रीम कोर्ट में भी ऐसी ही दलीलें दी गई थीं।
कलानिधि मारन के वकील ने किया विरोध
कलानिधि मारन और कल एयरवेज की ओर से सीनियर एडवोकेट जयंत मेहता ने स्पाइसजेट की याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी की बात पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय उनकी चुनौती को खारिज कर दिया था और उन पर जुर्माना भी लगाया था। उन्होंने तर्क दिया कि इस रिव्यू पिटीशन के जरिए स्पाइसजेट उन्हीं पुराने मुद्दों को फिर से उठा रही है, जिन पर फैसला हो चुका है।
विवाद का पूरा मामला क्या है?
यह पूरा विवाद एक आर्बिट्रेशन अवार्ड (Arbitration Award) से शुरू हुआ था, जो कलानिधि मारन और कल एयरवेज के पक्ष में आया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें स्पाइसजेट को 144 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा गया था।
स्पाइसजेट ने 18 मार्च 2026 को भी कैश डिपॉजिट के बदले प्रॉपर्टी देने की कोशिश की थी, लेकिन तब भी उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने फिर से रिव्यू पिटीशन दाखिल की, जिसे अब 4 मई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
केस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुख्य पक्ष | स्पाइसजेट और अजय सिंह बनाम कलानिधि मारन और कल एयरवेज |
| विवादित राशि | 144 करोड़ रुपये |
| कोर्ट का जुर्माना | 50,000 रुपये |
| जज का नाम | जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद |
| प्रॉपर्टी की लोकेशन | गुरुग्राम (अजय सिंह की संपत्ति) |
| पिछली अर्जी खारिज होने की तारीख | 18 मार्च, 2026 |
| ताजा आदेश की तारीख | 4 मई, 2026 |
FAQs
प्रश्न 1: दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट पर कितना जुर्माना लगाया है?
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट पर 50,000 रुपये का जुर्माना (Cost) लगाया है।
प्रश्न 2: स्पाइसजेट को कितनी रकम जमा करने का आदेश दिया गया है?
स्पाइसजेट को कलानिधि मारन के साथ विवाद में 144 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया गया है।
प्रश्न 3: स्पाइसजेट ने कैश के बदले क्या देने का प्रस्ताव रखा था?
स्पाइसजेट ने कैश के बदले गुरुग्राम में स्थित अजय सिंह की एक प्रॉपर्टी को गारंटी के तौर पर रखने का प्रस्ताव दिया था।
प्रश्न 4: यह विवाद किन दो पक्षों के बीच है?
यह विवाद स्पाइसजेट (अजय सिंह) और कलानिधि मारन (कल एयरवेज) के बीच चल रहा है।
इस फैसले के बाद अब स्पाइसजेट को कोर्ट के आदेश के अनुसार तय रकम जमा करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पुराने मुद्दों को बार-बार रिव्यू पिटीशन के जरिए नहीं उठाया जा सकता।