Odisha Board 10th Result 2026: नेत्रहीन और मूक-बधिर छात्रों ने किया कमाल, स्कूलों का रहा 100% रिजल्ट
ओडिशा के गंजम जिले से एक बहुत ही प्रेरणादायक खबर सामने आई है। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद, नेत्रहीन (visually impaired) और मूक-बधिर (hearing impaired) छात्रों ने अपनी मेहनत से सफलता हासिल की है। ओडिशा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (BSE) द्वारा घोषित कक्षा 10 के परिणामों में दो विशेष स्कूलों के सभी 25 छात्रों ने परीक्षा पास कर ली है।
इन स्कूलों के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इस साल भी इन संस्थानों ने अपना 100% Success रिकॉर्ड बरकरार रखा है। ओडिशा हाई स्कूल सर्टिफिकेट (HSC) का रिजल्ट शनिवार को जारी किया गया था।
Red Cross School for the Blind: 43 सालों से लगातार जीत
गंजम जिले में स्थित ‘रेड क्रॉस स्कूल फॉर द ब्लाइंड’ ने इस साल भी शानदार प्रदर्शन किया है। स्कूल के प्रिंसिपल प्रिया रंजन महाकुडा (Priya Ranjan Mahakuda) ने बताया कि उनके स्कूल ने पिछले 43 सालों से लगातार 100% रिजल्ट देने का रिकॉर्ड बनाया है।
इस साल इस स्कूल से कुल 12 नेत्रहीन छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें 3 लड़कियां भी शामिल थीं। सभी छात्रों ने सफलतापूर्वक परीक्षा पास की है। छात्रों के ग्रेड्स की जानकारी नीचे दी गई है:
| Grade | Number of Students | Percentage Range |
|---|---|---|
| B1 Grade | 2 Students | Above 70% |
| B2 Grade | 8 Students | 60% to 69% |
| C Grade | 2 Students | 50% to 59% |
इस स्कूल की स्थापना 1974 में हुई थी। 1983 में छात्रों के पहले बैच के बाद से, यह आवासीय स्कूल (residential school) हर साल मैट्रिक परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम हासिल कर रहा है। प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल का टीचिंग स्टाफ छात्रों का खास ख्याल रखता है, जिससे उन्हें यह सफलता मिलती है।
ब्रेल लिपि और हेल्पर-राइटर की मदद
इन छात्रों की पढ़ाई के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं। क्लासरूम में छात्रों को ब्रेल (Braille) टेक्स्टबुक की मदद से पढ़ाया जाता है। हालांकि, परीक्षा के दौरान ये छात्र खुद नहीं लिखते। वे ‘हेल्पर-राइटर’ (helper-writer) की मदद लेते हैं। ये राइटर जूनियर छात्र होते हैं, जिन्हें नेत्रहीन छात्र उत्तर बोलकर लिखवाते हैं।
स्कूल के रिटायर्ड प्रिंसिपल नबीन सतपथी (Nabeen Satapathy) ने बताया कि इस स्कूल से पास होने वाले ज्यादातर छात्र आज देश भर के सरकारी और अन्य क्षेत्रों में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं।
Helen Keller Red Cross School for the Deaf का प्रदर्शन
इसी तरह, ‘हेलेन केलर रेड क्रॉस स्कूल फॉर द डेफ’ के छात्रों ने भी कमाल कर दिखाया है। स्कूल के प्रिंसिपल बौरीबंधु नायक (Bauribandhu Nayak) ने बताया कि उनके स्कूल के सभी 13 मूक-बधिर छात्रों ने इस साल HSC परीक्षा पास कर ली है। इस स्कूल का रिकॉर्ड भी बहुत शानदार है और पिछले तीन दशकों (30 साल) से यहां का रिजल्ट 100% रह रहा है।
सरकार और ब्रेल प्रेस का सहयोग
पहले इन छात्रों को ब्रेल किताबों की कमी के कारण काफी परेशानी होती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से सरकार छात्रों को मुफ्त में ब्रेल किताबें उपलब्ध करा रही है। ये किताबें स्थानीय स्तर पर चलने वाली सरकारी कंप्यूटरीकृत ब्रेल प्रेस (Braille press) में छपती हैं।
ब्रेल प्रेस के मैनेजर प्रकाश नारायण रथ (Prakash Narayan Rath) ने बताया कि वे कक्षा 10 और अन्य कक्षाओं के लिए ब्रेल किताबें छापते हैं और सरकारी निर्देशानुसार विभिन्न संस्थानों को मुफ्त में सप्लाई करते हैं।
छात्रों के बड़े सपने
सफलता पाने वाले छात्रों में जीतेंद्र साहू (Jitendra Sahu) भी शामिल हैं, जिन्होंने B1 ग्रेड हासिल किया है। जीतेंद्र अब कॉलेज जाकर कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं। उनकी तरह अन्य छात्र भी उच्च शिक्षा (higher studies) प्राप्त कर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं।
FAQs
1. ओडिशा के इन विशेष स्कूलों का रिजल्ट कैसा रहा?
रेड क्रॉस स्कूल फॉर द ब्लाइंड और हेलेन केलर रेड क्रॉस स्कूल फॉर द डेफ, दोनों स्कूलों का रिजल्ट 100% रहा है।
2. नेत्रहीन छात्रों ने परीक्षा कैसे दी?
नेत्रहीन छात्रों ने ‘हेल्पर-राइटर’ की मदद से परीक्षा दी। छात्र उत्तर बोलते थे और राइटर उसे पेपर पर लिखते थे।
3. रेड क्रॉस स्कूल फॉर द ब्लाइंड का 100% रिजल्ट का रिकॉर्ड कितने साल पुराना है?
यह स्कूल पिछले 43 सालों (1983 से) से लगातार 100% रिजल्ट दे रहा है।
4. छात्रों को पढ़ाई के लिए किताबें कहां से मिलती हैं?
छात्रों को सरकारी ब्रेल प्रेस से छपी ब्रेल टेक्स्टबुक सरकार द्वारा मुफ्त में दी जाती हैं।