Pune Underground Road Project: ट्रैफिक खत्म करने के लिए बनेगा 34,000 करोड़ का अंडरग्राउंड रोड नेटवर्क

Pune Underground Road Project: ट्रैफिक खत्म करने के लिए बनेगा 34,000 करोड़ का अंडरग्राउंड रोड नेटवर्क

पुणे शहर में ट्रैफिक की समस्या को खत्म करने के लिए एक बहुत बड़ा प्लान तैयार किया गया है। पुणे में अब 34,000 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल Underground Road Network बनाया जाएगा। यह नेटवर्क लगभग 45 किलोमीटर लंबा होगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शहर के बड़े ट्रैफिक जाम वाले पॉइंट्स (Choke Points) को कम करना और Urban Mobility को बेहतर बनाना है।

5 अंडरग्राउंड कॉरिडोर से बदलेगी पुणे की सूरत

पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (PMC) ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक शुरुआती ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस प्लान के तहत शहर में 5 Underground Corridors बनाए जाएंगे। यह पूरा सिस्टम उत्तर से दक्षिण (North-South) की तरफ फैला होगा। अधिकारियों का मानना है कि इन टनल (Tunnels) के बनने से सफर का समय बहुत कम हो जाएगा और सड़कों पर दबाव भी घटेगा।

इन इलाकों को मिलेगा फायदा (Proposed Routes)

यह अंडरग्राउंड रोड नेटवर्क पुणे के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों से होकर गुजरेगा। इसमें निम्नलिखित मुख्य रूट्स और इलाके शामिल हैं:

कॉरिडोर का नाम/रूट जुड़ने वाले मुख्य इलाके
रूट 1 शास्त्रीनगर (Shastrinagar) से कोंढवा (Kondhwa)
रूट 2 पुणे रेलवे स्टेशन, यरवदा (Yerawada) और सिंहगढ़ रोड (Sinhagad Road)
रूट 3 पाषाण-कोथरुड (Pashan-Kothrud) से हिंगणे-खुर्द (Hingne-Khurd)
अन्य कवर्ड एरिया स्वारगेट (Swargate), खड़की (Khadki) और अन्य व्यस्त जोन

अधिकारियों के अनुसार, इस टनल सिस्टम को पुणे मेट्रो के नॉर्थ-साउथ नेटवर्क के विस्तार के साथ जोड़ा जाएगा ताकि शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम एक साथ मिलकर काम कर सके।

अंडरग्राउंड रोड की जरूरत क्यों पड़ी?

पुणे में गाड़ियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। सड़कों को चौड़ा करना अब मुश्किल हो गया है क्योंकि घनी आबादी वाले इलाकों में Land Acquisition (जमीन अधिग्रहण) एक बड़ी चुनौती है। इसलिए, प्रशासन अब Underground Infrastructure को एक लंबे समय के समाधान (Long-term Solution) के रूप में देख रहा है। इससे जमीन के ऊपर की हलचल में कोई रुकावट नहीं आएगी और भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।

Special Purpose Vehicle (SPV) का होगा गठन

इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक Special Purpose Vehicle (SPV) बनाएगी। यह संस्था प्रोजेक्ट की प्लानिंग और उसे लागू करने का काम देखेगी। इस टीम में सीनियर सरकारी अधिकारी, ट्रैफिक मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स, पुलिस और म्युनिसिपल अथॉरिटी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। म्युनिसिपल कमिश्नर नवल किशोर राम (Naval Kishore Ram) ने बताया है कि प्रशासन ने इस टनल कॉरिडोर के प्रस्ताव पर शुरुआती काम शुरू कर दिया है।

बसों के लिए अलग लेन और ‘Underground Pune’ का विजन

इस प्रोजेक्ट में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार कुछ खास रास्तों पर म्युनिसिपल बसों के लिए दो अलग Underground Lanes बनाने पर विचार कर रही है। इससे बसें बिना किसी ट्रैफिक जाम के चल सकेंगी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत होगा। यह पूरा प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के ‘Underground Pune’ मॉडल के विजन का हिस्सा है, जिसका मकसद शहर के ट्रांसपोर्ट इकोसिस्टम को मॉडर्न बनाना है।

अभी क्या है प्रोजेक्ट का स्टेटस?

अधिकारियों ने साफ किया है कि यह प्रोजेक्ट अभी अपने शुरुआती स्टेज (Preliminary Stage) में है। इसे लागू करने से पहले कई महत्वपूर्ण काम किए जाने बाकी हैं:

  • Detailed Project Reports (DPR): प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
  • Environmental Clearances: पर्यावरण विभाग से मंजूरी लेनी होगी।
  • Financial Viability Studies: प्रोजेक्ट के आर्थिक पहलुओं की जांच होगी।
  • International Consultants: अंतरराष्ट्रीय सलाहकारों की नियुक्ति की जाएगी जो मिट्टी की जांच (Geological Assessments), टनल इंजीनियरिंग और ट्रैफिक प्लानिंग करेंगे।

इन स्टडीज के बाद ही प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय और सही लागत का पता चल पाएगा।

FAQs

पुणे अंडरग्राउंड रोड प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है?

इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 34,000 करोड़ रुपये है।

यह नेटवर्क कितना लंबा होगा?

यह पूरा अंडरग्राउंड रोड नेटवर्क लगभग 45 किलोमीटर लंबा होने की उम्मीद है।

इस प्रोजेक्ट में कितने कॉरिडोर बनाए जाएंगे?

शुरुआती प्लान के मुताबिक, शहर के ट्रैफिक को कम करने के लिए 5 अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनाए जाएंगे।

क्या इसमें बसों के लिए अलग रास्ता होगा?

हां, सरकार कुछ रास्तों पर म्युनिसिपल बसों के लिए दो समर्पित अंडरग्राउंड लेन बनाने की योजना बना रही है।

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