पाकिस्तान सेना ने आतंकियों को दिया ‘मिलिट्री फ्यूनरल’, नेता शाहीर सियलवी का बड़ा खुलासा
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ नेता शाहीर सियलवी (Shaheer Sialvi) ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की सेना (Pakistan Army) ने उन आतंकियों को सैन्य सम्मान (Military Funerals) दिया था, जो भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान मारे गए थे। यह बयान भारत के इस बड़े सैन्य ऑपरेशन की पहली सालगिरह से ठीक पहले आया है।
आतंकियों को मिला सरकारी सम्मान
पाकिस्तान नजरियाती पार्टी (Pakistan Nazriyati Party – PNP) के प्रमुख शाहीर सियलवी ने बताया कि देश के सशस्त्र बलों ने मारे गए आतंकियों को पूरा ‘स्टेट ऑनर’ (State Honours) दिया। उन्होंने कहा कि आतंकियों के जनाजे में वर्दीधारी सैनिक (Uniformed Pallbearers) शामिल थे। सियलवी के अनुसार, इन आतंकियों का अंतिम संस्कार किसी मौलवी ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान सेना के धार्मिक अधिकारियों (Religious Officials) ने करवाया था।
सियलवी ने यह भी बताया कि आतंकियों के शवों को वर्दीधारी जवानों ने अपने कंधों पर उठाया था। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि दुनिया को यह दिखाया जा सके कि मारे गए लोग आतंकी नहीं थे, बल्कि वे ‘फाइटर्स’ (Fighters) थे जिन्होंने किसी मकसद के लिए अपनी जान दी।
हाफिज सईद और मसूद अजहर का समर्थन
शाहीर सियलवी ने यह बातें लश्कर-ए-तैयबा (LeT) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने खुलेआम स्वीकार किया कि पाकिस्तान की सेना हाफिज सईद (Hafiz Saeed) और मसूद अजहर (Masood Azhar) जैसे घोषित आतंकियों का सीधा समर्थन करती है। सियलवी ने यह भी माना कि वह खुद लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद से मिल चुके हैं।
सियलवी के पिता पाकिस्तान सेना में ब्रिगेडियर हैदर मलिक (Brigadier Haider Malik) हैं। सियलवी ने भारत द्वारा किए गए हमलों का जिक्र करते हुए मुरीदके (Muridke) और बहावलपुर (Bahawalpur) का नाम लिया। ये दोनों जगहें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के मजबूत ठिकाने माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार मुरीदके और बहावलपुर पर हमले हुए, जिन्हें भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी केंद्र घोषित कर रखा था।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला?
भारत ने पिछले साल 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) शुरू किया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम (Pahalgam) में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया था। पहलगाम हमले में 26 आम नागरिकों (Civilians) की मौत हो गई थी।
ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में आतंकी बुनियादी ढांचे (Terror Infrastructure) को नष्ट करना था। इसमें मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। यह सैन्य टकराव चार दिनों तक चला और 10 मई को तनाव कम करने के समझौते के साथ समाप्त हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| ऑपरेशन का नाम | ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) |
| शुरुआत की तारीख | 7 मई, 2025 |
| समाप्ति की तारीख | 10 मई, 2025 |
| कारण | पहलगाम हमला (22 अप्रैल, 2025) |
| पहलगाम हमले में मौतें | 26 नागरिक |
| निशाना बनाए गए आतंकी संगठन | लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) |
| प्रमुख स्थान | मुरीदके और बहावलपुर |
निष्कर्ष
शाहीर सियलवी का यह बयान पाकिस्तान के उस दावे को पूरी तरह झुठलाता है जिसमें वह कहता रहा है कि उसका आतंकियों से कोई लेना-देना नहीं है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि पाकिस्तान की सेना और वहां के आतंकी संगठनों के बीच गहरे संबंध हैं। पाकिस्तान आर्मी मिलिट्री फ्यूनरल (Pakistan Army military funerals) का यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
FAQs
शाहीर सियलवी कौन हैं?
शाहीर सियलवी पाकिस्तान नजरियाती पार्टी (PNP) के प्रमुख हैं और उनके पिता पाकिस्तान सेना में ब्रिगेडियर रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर क्यों चलाया गया था?
यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी।
सियलवी ने किन आतंकी नेताओं का नाम लिया?
सियलवी ने लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर का नाम लिया और उनके साथ सेना के संबंधों की बात की।
पाकिस्तान सेना ने आतंकियों का अंतिम संस्कार कैसे किया?
सियलवी के अनुसार, सेना ने आतंकियों को मिलिट्री फ्यूनरल दिया, जिसमें वर्दीधारी सैनिकों ने शवों को उठाया और सेना के धार्मिक अधिकारियों ने अंतिम संस्कार करवाया।