New Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे टैक्स के नियम, आपकी सैलरी और बचत पर पड़ेगा बड़ा असर
भारत में 1 अप्रैल 2026 से New Income Tax Rules लागू होने जा रहे हैं। यह नए नियम Financial Year 2026-27 की शुरुआत के साथ प्रभावी होंगे। हालांकि सरकार ने Tax Slab Rates में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन Allowances, Perks और Compliance नियमों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर Salaried Employees की इन-हैंड सैलरी और टैक्स कैलकुलेशन पर पड़ेगा।
Tax Slabs में कोई बदलाव नहीं
Union Budget 2026 में Income Tax Slabs में किसी भी तरह के बदलाव का प्रस्ताव नहीं दिया गया था। इसका मतलब है कि पुराने और नए दोनों टैक्स रिजीम (Tax Regimes) में टैक्स की दरें पहले जैसी ही रहेंगी। टैक्स में जो भी बदलाव दिखेंगे, वे छूट (Exemptions) और भत्तों (Allowances) के नियमों में बदलाव के कारण होंगे।
Allowances और Exemptions में बड़ी बढ़ोतरी
सरकार ने कर्मचारियों को मिलने वाले कई भत्तों की सीमा को काफी बढ़ा दिया है। इससे कर्मचारियों को टैक्स बचाने में मदद मिलेगी। नीचे दी गई टेबल में आप पुराने और नए नियमों की तुलना देख सकते हैं:
| Allowance Type | Old Limit | New Limit (From April 1, 2026) |
|---|---|---|
| Children Education Allowance | ₹100 प्रति महीना (प्रति बच्चा) | ₹3,000 प्रति महीना (प्रति बच्चा) |
| Hostel Expenditure Allowance | ₹300 प्रति महीना (प्रति बच्चा) | ₹9,000 प्रति महीना (प्रति बच्चा) |
| Meal Cards (Sodexo/Pluxee) | ₹50 प्रति मील | ₹200 प्रति मील |
| Corporate Gift Cards/Vouchers | – | ₹15,000 सालाना (Tax Free) |
| Transport Allowance (Transport Systems) | ₹10,000 प्रति महीना | ₹25,000 प्रति महीना |
HRA के नियमों में बदलाव
House Rent Allowance (HRA) के नियमों में भी विस्तार किया गया है। अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों को भी 50 प्रतिशत छूट वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। पहले यह सुविधा केवल दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों तक सीमित थी।
Corporate Loans और Company Cars पर नए नियम
अगर आप अपनी कंपनी से कम ब्याज या बिना ब्याज वाला लोन लेते हैं, तो अब उस पर टैक्स SBI की लेंडिंग रेट के आधार पर लगेगा। हालांकि, ₹2 लाख तक के लोन और मेडिकल इमरजेंसी के लिए लिए गए लोन को टैक्स फ्री रखा गया है। पहले यह सीमा केवल ₹20,000 थी।
कंपनी की तरफ से मिलने वाली कारों (Company-Provided Cars) पर टैक्स अब और सख्त हो गया है:
- 1.6 लीटर तक की इंजन क्षमता वाली कारों पर ₹8,000 प्रति महीना टैक्स लगेगा।
- 1.6 लीटर से ज्यादा इंजन क्षमता वाली कारों पर ₹10,000 प्रति महीना टैक्स लगेगा।
- उदाहरण के लिए, 1.8 लीटर इंजन वाली SUV का टैक्स मूल्य ₹2,400 से बढ़कर ₹7,000 प्रति महीना हो सकता है।
- अगर कार के साथ ड्राइवर (Chauffeur) भी मिलता है, तो आपकी सालाना टैक्सेबल इनकम में ₹1.2 लाख से ज्यादा जुड़ सकते हैं।
Share Market और Buybacks पर असर
शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए भी नियम बदल गए हैं। Securities Transaction Tax (STT) की दरें बढ़ा दी गई हैं:
| Transaction Type | Old STT Rate | New STT Rate |
|---|---|---|
| Equity Futures | 0.02% | 0.05% |
| Equity Options | 0.1% | 0.15% |
इसके अलावा, Share Buybacks से होने वाली कमाई पर अब निवेशकों को Capital Gains Tax देना होगा। प्रमोटर शेयरधारकों के लिए बायबैक टैक्स की दरें अलग होंगी: कॉर्पोरेट प्रमोटरों के लिए 22% और नॉन-कॉर्पोरेट प्रमोटरों के लिए 30%।
TCS Rates में बदलाव
Tax Collected at Source (TCS) की दरों को भी तर्कसंगत बनाया गया है:
- Alcoholic Beverages: शराब पर TCS रेट 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है।
- Overseas Tour Packages: विदेश यात्रा के पैकेज पर अब 2% फ्लैट TCS लगेगा। पहले यह 5% से 20% के बीच था।
- LRS Remittances: विदेश में पढ़ाई, इलाज और यात्रा के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर अब एक समान 2% TCS लगेगा।
Labour Code और PF का असर
नए लेबर कोड (Labour Codes) के कारण कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है। अब कंपनियों को कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा ‘Basic Pay’ के रूप में रखना होगा। बेसिक पे बढ़ने से Provident Fund (PF) का योगदान बढ़ जाएगा। हालांकि इससे भविष्य के लिए बचत ज्यादा होगी, लेकिन हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है।
Income Tax Rules 2026 के ये बदलाव 1 अप्रैल से पूरी तरह लागू हो जाएंगे, इसलिए करदाताओं को अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग इसी के अनुसार करनी चाहिए।
FAQs
क्या 1 अप्रैल 2026 से टैक्स स्लैब बदल रहे हैं?
नहीं, इनकम टैक्स स्लैब की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बदलाव केवल अलाउंस और अन्य नियमों में हुए हैं।
बच्चों की शिक्षा के लिए अब कितनी टैक्स छूट मिलेगी?
नए नियमों के अनुसार, Children Education Allowance की सीमा ₹100 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति महीना प्रति बच्चा कर दी गई है।
क्या विदेश यात्रा अब सस्ती होगी?
विदेश यात्रा के पैकेज पर TCS रेट को कम करके 2% कर दिया गया है, जो पहले 5% से 20% तक होता था। इससे शुरुआती खर्च में कमी आ सकती है।
PF योगदान बढ़ने से सैलरी पर क्या असर होगा?
नए लेबर कोड के कारण बेसिक सैलरी बढ़ेगी, जिससे PF का हिस्सा ज्यादा कटेगा। इससे आपकी इन-हैंड सैलरी कम हो सकती है लेकिन रिटायरमेंट फंड बढ़ जाएगा।