IDBI Bank Stake Sale: सरकार 27 अप्रैल को करेगी निजीकरण की समीक्षा, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

IDBI Bank Stake Sale: सरकार 27 अप्रैल को करेगी निजीकरण की समीक्षा, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

IDBI Bank के निजीकरण (Privatisation) की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। भारत सरकार IDBI Bank में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी की समीक्षा करने जा रही है। इसके लिए 27 अप्रैल 2026 को एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई गई है। इस मीटिंग में विनिवेश (Disinvestment) पर सचिवों का मुख्य समूह हिस्सा लेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही साफ कर दिया है कि देरी के बावजूद निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस बार सरकार बैंक के नए मूल्यांकन (Fresh Valuation) पर ध्यान दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की उम्मीदों और बाजार की हकीकत के बीच तालमेल बिठाना है।

27 अप्रैल की मीटिंग में क्या होगा?

कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होने वाली इस मीटिंग में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि बोली लगाने वाले निवेशकों (Bidders) की रुचि कितनी है। साथ ही, बैंक की कीमत यानी Valuation के मानकों को फिर से तय किया जाएगा।

इस मीटिंग में निम्नलिखित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे:

  • DIPAM (निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग)
  • वित्तीय सेवाएं विभाग (Financial Services)
  • आर्थिक मामले (Economic Affairs)
  • कानूनी मामले (Legal Affairs)
  • नीति आयोग (NITI Aayog)

IDBI Bank निजीकरण का पूरा टाइमलाइन

IDBI Bank की हिस्सेदारी बेचने की कोशिश काफी समय से चल रही है। नीचे दी गई टेबल में आप इस पूरी प्रक्रिया का सफर देख सकते हैं:

समय / साल प्रमुख घटना (Event)
2010 के मध्य में बैंक के खराब लोन (Bad Loans) बढ़ गए और वित्तीय स्थिति कमजोर हो गई।
2018-2019 LIC ने बैंक में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी और मैनेजमेंट कंट्रोल अपने हाथ में लिया।
अक्टूबर 2022 सरकार ने औपचारिक रूप से 60.72% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की।
शुरुआत 2023 कई निवेशकों ने बैंक खरीदने में रुचि (Expression of Interest) दिखाई।
2023 – 2025 रेगुलेटरी अप्रूवल और ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) की प्रक्रिया चली।
फरवरी 2026 निवेशकों ने अपनी वित्तीय बोलियां (Financial Bids) जमा कीं।
अप्रैल 2026 बोलियां कम होने के कारण सरकार ने नया मूल्यांकन (Fresh Valuation) शुरू किया।

हिस्सेदारी और बिक्री का ढांचा

सरकार और LIC मिलकर IDBI Bank में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। इसके साथ ही बैंक का मैनेजमेंट कंट्रोल भी नए खरीदार को सौंप दिया जाएगा। यह कदम बैंकिंग सेक्टर में सरकार की सीधी भूमिका को कम करने के सुधार का हिस्सा है।

फरवरी 2026 में जो बोलियां आई थीं, वे सरकार की तय की गई न्यूनतम कीमत (Reserve Price) से कम थीं। इसी वजह से सरकार को रुकना पड़ा और अब नए सिरे से बैंक की वैल्यू निकाली जा रही है।

IDBI Bank की बिक्री क्यों है जरूरी?

IDBI Bank का निजीकरण भारत की विनिवेश रणनीति के लिए एक बड़ा टेस्ट केस है। इसके सफल होने से कई फायदे होंगे:

  • यह बैंकिंग सुधारों में निवेशकों के भरोसे को बढ़ाएगा।
  • भविष्य में अन्य सरकारी बैंकों (PSU Banks) के निजीकरण का रास्ता साफ होगा।
  • सरकार को अपनी हिस्सेदारी बेचकर बड़ी रकम मिलेगी।

आगे क्या होगा?

अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि बैंक की कीमत को बाजार के हिसाब से सही रखा जाए ताकि निवेशक आकर्षित हों। 27 अप्रैल की मीटिंग के बाद नई समय सीमा (Timelines) और ट्रांजैक्शन के ढांचे में बदलाव की घोषणा हो सकती है।

FAQs

1. सरकार IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी बेच रही है?

सरकार और LIC मिलकर IDBI Bank में कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं।

2. फरवरी 2026 में निजीकरण की प्रक्रिया क्यों रुक गई थी?

निवेशकों द्वारा लगाई गई बोलियां सरकार की उम्मीद (Reserve Price) से कम थीं, इसलिए प्रक्रिया को रोकना पड़ा।

3. 27 अप्रैल 2026 की मीटिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस मीटिंग का उद्देश्य बैंक का नया मूल्यांकन (Fresh Valuation) करना और निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए रणनीति बनाना है।

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